हाल ही में चीन ने दावा किया है कि उसने कोरोना की दवाई बना ली है जिससे मरीज ठीक हो रहे हैं। चीन ने कहा है कि फ्लू की दवाई से कोरोना के मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं। उस दवाई का नाम फेवीपिरावीर हैं। इस दवाई को एविगन के नाम से भी जाना जाता है।

इस दवा को 2014 में इनफ्लुएंजा के इलाज के लिए जापान की फूजीफिल्म नामक कंपनी ने तैयार किया था। 2016 में इबोला वायरस के रोकथाम के लिए दक्षिण अफ्रीका के देश गिनी में भी इस दवाई का प्रयोग किया गया था।

चीन ने कोरोना पर काबू पाया - अप्रैल तक क्लिनिकल ट्रायल शुरु होगा

फिलहाल कोरोना के इलाज में इस दवाई का इस्तेमाल चीन में हुआ है। जहां से कोरोनावायरस की शुरुआत हुई थी जहां 80 हजार से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हुए थे तथा 3,000 से ज्यादा लोगों की मौेंत हो चुकी हैं।
चीन के शेनजेन शहर में 80 कोरना मरीजों को दो हिस्सों में बांट दिया गया था। जिनमें 35 मरीजों को फेवीपिरावीर की दवा दी जाएगी जबकि 45 मरीजों को बिना दवाई के आइसोलेशन में रखा गया।
जिन 35 मरीजों को यह दवा दी गई वो जल्दी ही कोरोना से ठीक हो गए।

चीन ने इस क्लीनिकल ट्रायल की पुष्टि की। चीन ने कहा कि इस दवाई का प्रयोग जल्दी ही कोरोना के इलाज में किया जाएगा। चीन की इस पुष्टि के बाद फूजीफिल्म कंपनी के शेयर में 15 फ़ीसदी बढ़ोतरी हुई है।

विश्व में महामारी बनकर फैल चुके कोरोना वायरस की दवा खोजने में पूरी दुनिया जुटी हुई है। अमेरिका से लेकर जर्मनी तथा चीन तक ने वैक्सीन बनाने के काफी करीब पहुंचने का दावा किया है।

हम आपको बता रहे हैं कि कोरोना की वैक्सीन बनाने में कौनसा देश कितना करीब पहुंच चुका है।
अमेरिका ने वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू कर दिया है। यह प्रयोग अभी 3 लोगों के ऊपर किया जा रहा है और 45 लोगों पर वैक्सीन का परीक्षण किया जाएगा। 6 हफ्ते तक लोगों पर वैक्सीन का परीक्षण होगा और उनके नतीजों का इंतजार किया जाएगा। इस टेस्ट में हर व्यक्ति को 2 टीके दिए जाएंगे।

इधर चीन ने भी वैक्सीन को क्लिनिकल ट्रायल की मंजूरी दे दी है। अप्रैल से चीन क्लिनिकल ट्रायल शुरू कर देगा।

रूस की बात करें तो रूस ने जानवरों पर कोरोना को मारने के लिए वैक्सीन का परीक्षण शुरू कर दिया है। जून तक इस वैक्सीन को मंजूरी मिल सकती है और जर्मनी की बात करें तो जर्मनी में क्योरावैक कंपनी वैक्सीन बनाने पर कार्य कर रही है और यह दावा भी है कि जल्दी ही उनको सफलता प्राप्त होगी। यूरोपियन यूनियन ने क्योरावैक में बड़े निवेश का ऐलान किया है।

और अब हमारे भारत की बात करें तो कई कंपनियां वैक्सीन बनाने में जुटी हुई है। भारत में वैक्सीन बनाने में 1.5 से 2 साल का समय लग सकता है। हर देश इस कोशिश में लगा है कि इस वायरस का किसी भी प्रकार से इलाज ढूंढा जा सके।

भारत में करोऩों का असर बुरी तरह पड़ रहा है। रेलवे के 63 फ़ीसदी टिकट रद्द हो गए हैं। भारतीय सेना के सभी कार्यक्रम रोक दिए गए हैं और CBSE समेत सभी परीक्षाओं पर 31 मार्च तक रोक लगा दी है। इधर पंजाब यूनिवर्सिटी तथा बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी ने भी सभी हॉस्टल खाली करने के आदेश जारी कर दी है। केंद्रीय विद्यालयों में आठवीं तक छुट्टी दे दी है जबकि अन्य राज्यों में स्कूल, मॉल, थिएटर व कॉलेज सभी बंद कर दिये गये हैं। भारत में अब तक महाराष्ट्र में सबसे अधिक कोरोना के मामले सामने आए हैं।

bharatgurjar

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